सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Cultural Institute of India

भारत के सांस्कृतिक संस्थान:-

1. ललित कला अकादमी (National academy of fine art)
भारतीय कला (मूर्ति बनाने की विद्या, वास्तुकला और अनुप्रयुक्त कलाएं) के प्रति विदेश में समझ बढ़ने और प्रचार प्रसार के लिए इसकी स्थापना 1954 में की गई।
2. संगीत नाटक अकादमी (National academy of music, dance and drama)
राज्यो और स्वैच्छिक संगठनों के सहयोग से प्रदर्शित भारतीय कलाओं (नृत्य ,नाटक और संगीत) को प्रोत्साहित करने के लिए 1953 में इसकी स्थापना की गई।
3. राष्ट्रीय नाटक विद्यालय (National school of drama)
सन 1959 मैं इसकी स्थापना संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रीमियर नाट्यशाला स्थान के रूप में हुई। 1975 में एक स्वायत्त संस्थान के रूप में इसकी रजिस्ट्री हुई जो कि संघ सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाता है।
4. साहित्य अकादमी (sahitya academy)
इसकी स्थापना निम्न उद्देश्यों के साथ सन 1954 में हुई-
*भारतीय साहित्य का विकास करना।
*उच्च साहित्य मानकों का निर्माण करना।
*सभी भारतीय भाषाओं में साहित्य गतिविधियों को उत्साहित एवं समन्वित करना।
*इनके द्वारा देश की संस्कृति एकता को बढ़ाना ।
 5. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (archaelogical survey of India)
सन 1861 में निम्नलिखित उद्देश्यो के साथ इसकी स्थापना हुई:-
*भारत में स्थित विभिन्न भागों में पुरातात्विक स्मारकों और स्थानों को प्रशिक्षित और सुरक्षित रखना और स्थानीय संग्रहालयो को बनाए रखना। 
उत्खनन, अन्वेषण और शिलालेख अनुसंधानों, वास्तु विद्या अध्ययन और वैज्ञानिक शिक्षा और अन्वेषओं को लेना।
6. भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (National archives of India)
सन 1881 मैं इसकी स्थापना हुई और स्वतंत्रता तक इसे इंपीरियल रिकॉर्ड विभाग माना जाता था । वह भारत सरकार और उसके पुणे विधि कारों के स्थाई मूल्यों के सभी प्रचलित रिकॉर्ड ओं का सरकारी अभिरक्षक है।
7. एशियाटिक समाज (Asiatic society)
सन 1784 में इसकी स्थापना कोलकाता में प्रख्यात भारतविद सर विलियम जॉन्स द्वारा की गई जिसका उद्देश्य एशिया के इतिहास, पूरावस्तु, कला, विज्ञान और साहित्य की खोज करना है।
8. भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण (Anthropological survey of India)
सन 1945 में इसकी स्थापना कोलकाता में मानव विज्ञान और उससे संबंधित शाखाओं में वैज्ञानिक अनुसंधान की उन्नति के लिए की गई थी।यह मानव परिवर्तन और संस्कृति की संपूर्ण श्रेणियों के प्रमाणिक प्रयोग आधारों को एकत्रित करती है।
9. क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (zonal cultural centres)
क्षेत्रीय परिचरोकी सीमाओं को पार करने वाले सांस्कृतिक भाईचारे के रिश्ते को उभारने, परि रक्षित करने और जीवित रखने के लिए इन केंद्रों की स्थापना की गई। देश में कुल 7 ऐसे केंद्र हैं:-
1. उत्तरी-क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र- पटियाला
2. पूर्वी-क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र-शांतिनिकेतन
3. दक्षिणी-क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र-तंजौर
4. पश्चिमी-क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र-उदयपुर
5. उत्तर-मध्य क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र-इलाहाबाद
6. उत्तर-पूर्वी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र-दीमापुर
7. दक्षिण-मध्य क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र-नागपुर
10. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला, केंद्र (Indira Gandhi National centre for arts)
सन 1985 में नई दिल्ली में इसकी स्थापना एक संसाधन और आंकड़ा केंद्र के रूप में हुई।यहां सारी कलाओं के अध्ययन और असुरों की सम्मिलित केंद्र के रूप में कल्पना की गई है।यह विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक केंद्र है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शास्त्रीय नृत्य

भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्य भारत में सबसे महत्वपूर्ण मुख्य: 7 भागों में बांटा गया है:- *भरतनाट्यम:- यह तमिलनाडु का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य है,जिसे कर्नाटक संगीत के माध्यम से एक व्यक्ति प्रस्तुत करता है, यहां भ का अर्थ भाव से,र का अर्थ राग से, त का अर्थ ताल से, और नाट्यम का अर्थ थिएटर से है। यह नृत्य पहले मंदिरों मैं प्रदर्शित होता था। *कथकली:- यह केरल का प्रसिद्ध शास्त्रीय नृत्य है, इसमें कलाकार स्वयं गाता नहीं है, बल्कि एक विशेष लय एवं राग के संगीत पर नृत्य करता है, नाटक की कथावस्तु अधिकांश: महाकाव्य एवं पौराणिक कथाओं पर आधारित है। कथकली का शाब्दिक अर्थ है, किसी कहानी पर आधारित नाटक। *कुचिपुड़ी:- यह आंध्र प्रदेश का नाट्य नृत्य है। कुचिपुड़ी नामक गांव के नाम पर ही इसका नाम पड़ा, इसमें अनेक कथनको (धार्मिक या पौराणिक) पर नृत्य होता है। *ओडिसी:- यह उड़ीसा का प्राचीन नृत्य है, यह पूर्णता आराधना का नृत्य है, इसमें नृत्य के माध्यम से संपन्न का भाव लिए, नृत्य की ईश्वरीय स्तुति करती हैं। *कथक:- यह मूल्यत: उत्तर भारत का शास्त्रीय नृत्य है। 13वीं शताब्दी के संगीत रत्नाकर ग्रंथों में कत्थक शब्...

Ellora Caves(एलोरा की गुफाएं)

एलोरा की गुफाए यह पांचवी और दस वीं शताब्दी में बने थे, यहां 12 बौद्ध गुफाएं (1-12), 17 हिंदू गुफाएं (13-29) और पांच जैन गुफाएं (30-34) है। एलोरा भारतीय पाषाण शिल्प स्थापत्य कला का सार है। यहां "34 गुफाएं"है, जो असल में एक ऊर्ध्वाधर खड़ी चरणद्री पर्वत का फलक है। इसमें हिंदू, बौद्ध और जैन गुफा मंदिर बने हैं। यह सभी आसपास बनी है और अपने निर्माण काल की धार्मिक सौहार्द को दर्शाती हैं। एलोरा के 34 मठ और मंदिर औरंगाबाद के निकट 2 किलोमीटर के क्षेत्र में फैले हुए हैं। ऊंची बेसाल्ट की खड़ी चट्टानों की दीवारों को काटकर बनाया गया है। दुर्गम पहाड़ियों वाला एलोरा 600 से 1000 ईसवी के काल का है। यह प्राचीन भारतीय सभ्यता का जीवन्त प्रदर्शन करता है। हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म को भी समर्पित पवित्र स्थान एलोरा है। यह प्राचीन भारत के धैर्यवान चरित्र की व्याख्या भी करता है। एलोरा की गुफाएं यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल है। यह भारत की अतुल्य और अद्भुत वास्तुकला में शामिल है। एलोरा की गुफाएं अर्थात कैलाश गुफा की गुफा क्रमांक 16 का उल्लेख जरूर आता है। महाराष्ट्र में बने पर्यटक स्थलों में से औरंगा...

National Emblem of India

  भारत के राष्ट्रीय प्रतीक: - राष्ट्रीय ध्वज :- संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) का प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया। ध्वज में समान अनुपात वाले तीन पट्टियां है जो केसरिया, सफेद में हरे रंग की है। ध्वज में सबसे ऊपर गहरा केसरिया रंग होता है, जो जागृति, शौर्य तथा त्याग का प्रतीक है। बीच में सफेद रंग होता है जो सत्य एवं पवित्रता का प्रतीक है। तथा सबसे नीचे गहरा हरा रंग होता है जो जीवन समृद्धि का प्रतीक है। ध्वज के बीच में सफेद रंग वाली पट्टी के बीच में गहरे नीले रंग की 24 तिलिया वाला अशोक चक्र है जो धर्म और ईमानदारी के मार्ग पर चलकर देश को उन्नति की ओर ले जाने की प्रेरणा देता है। ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 हैं। दूध का प्रयोग और प्रदर्शन एक संहिता द्वारा नियमित होता है।                          राष्ट्रीय गान  रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा रचित 'जन गण मन 'को भारत के राष्ट्रीय गान के रूप में स्वीकार किया गया । जन गण मन अधिनायक जया है। भारत भाग्य विधाता।। पंजाब सिंध गुजरात मराठा। द्रविड़ उत्कल बंगा।। विंध्य हि...